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590 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड विक्रम वाधवा गिरफ्तार, कई शहरों में छापेमारी के बाद बड़ा खुलासा

Photo Source : Google

Posted On:Saturday, March 14, 2026

चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को 52 वर्षीय होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा को 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह घोटाला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और करीब 190 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, जो यूटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चंडीगढ़ और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) से संबंधित बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, घोटाले का खुलासा 22 फरवरी 2026 को हुआ था, जिसके बाद से वाधवा फरार चल रहा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने इंस्पेक्टर सतविंदर सिंह के नेतृत्व में उसे खरड़ में एक ठिकाने से पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि वाधवा मूल रूप से मलोट का रहने वाला है और 1990 के दशक में चंडीगढ़ आकर एक गेस्ट हाउस में 1500 रुपये की नौकरी करता था, लेकिन बाद में उसने रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार खड़ा कर लिया। पुलिस अब उसे अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी ताकि करीब 2400 से अधिक संदिग्ध लेनदेन की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके।

जांच के दौरान पुलिस ने पहले कांसल इलाके से वाधवा की कथित रेंज रोवर कार भी बरामद की थी। उधर, इस मामले की जांच कर रहे हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार कम से कम आठ सरकारी विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। इनमें विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शामिल हैं। यह राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखने के लिए भेजी गई थी, लेकिन कथित तौर पर 12 संदिग्ध खातों के जरिए निकाल ली गई।

अधिकारियों के मुताबिक फर्जी डेबिट मेमो और बैंक स्टेटमेंट के जरिए यह रकम बिना अनुमति के ट्रांसफर की गई। अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि, अभय कुमार और विभागीय अधीक्षक नरेश कुमार भुवानी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वाधवा ने इस पैसे को विभिन्न कंपनियों के जरिए घुमाने में अहम भूमिका निभाई। इसके लिए स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया गया और करीब 100 करोड़ रुपये नकली बिलों के जरिए ज्वेलरी कारोबार में ट्रांसफर किए गए, जिससे सोना खरीदने का झूठा रिकॉर्ड बनाया गया।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस घोटाले की बड़ी रकम बाद में वाधवा से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों जैसे प्रिज्मा रेजिडेंसी एलएलपी और किनस्पायर रियल्टी एलएलपी तक पहुंचाई गई। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु समेत 19 ठिकानों पर छापेमारी कर 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।


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