चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों ने संभावित परमाणु हमले के खतरे को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में बहरीन के एक एजेंट ने चंडीगढ़ स्थित एक दवा कंपनी से न्यूक्लियर इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली दवा प्रुशियन ब्लू कैप्सूल की जानकारी मांगी है।
जानकारी के अनुसार यदि बातचीत सफल होती है तो चंडीगढ़ से करीब एक करोड़ प्रुशियन ब्लू कैप्सूल खाड़ी देशों को सप्लाई किए जा सकते हैं। यह दवा शरीर में प्रवेश करने वाले रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करने में मदद करती है और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में सहायक होती है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने प्रुशियन ब्लू को रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाओं की सूची में शामिल किया है। पहले इसका उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप में होता था, जबकि भारत में इसका व्यावसायिक उत्पादन लगभग दो वर्ष पहले शुरू हुआ।
बताया जा रहा है कि बहरीन के फार्मा अधिकारी ने कंपनी से यह भी पूछा है कि क्या वह एक करोड़ कैप्सूल तैयार करने की क्षमता रखती है और महिलाओं, पुरुषों तथा बच्चों के लिए अलग-अलग डोज की जानकारी भी मांगी है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है।
यह दवा डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसे दिल्ली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज में विकसित किया गया है। कंपनी की निदेशक डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार यदि समझौता होता है तो दवाओं की खेप बहरीन के साथ-साथ कुवैत, कतर और जॉर्डन को भी भेजी जा सकती है।
इसके अलावा बहरीन की ओर से पोटेशियम आयोडाइड की करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की मांग भी जताई गई है। यह दवा न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के साथ-साथ हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी उपयोग की जाती है।