चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: दहेज प्रताड़ना के मामले में पत्नी को कथित तौर पर जहरीला पदार्थ जबरन पिलाने के आरोपित पति को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत नियम है और जेल अपवाद। जमानत पर विचार करते समय अदालत मिनी ट्रायल नहीं कर सकती, बल्कि हिरासत की अवधि, आरोपों की प्रकृति और मुकदमे की प्रगति जैसे पहलुओं को देखना आवश्यक होता है।
मामला हरियाणा के सिरसा जिले के रोड़ी थाना क्षेत्र का है, जहां 16 सितंबर 2024 को एफआईआर दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि विवाह के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उसे पति पवन कुमार और ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। 14 सितंबर 2024 को कथित तौर पर पति ने अन्य परिजनों के साथ मिलकर उसे घास सुखाने और जलाने में इस्तेमाल होने वाला जहरीला पदार्थ जबरन पिला दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि यह तथ्य विवादित नहीं है कि उसी दिन पति और पत्नी दोनों को उसी पदार्थ के सेवन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोटों के अभाव का उल्लेख है, जिससे जबरन पिलाए जाने की संभावना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होती है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि झगड़े के बाद आरोपी ने स्वयं वह पदार्थ खाया था और शिकायतकर्ता ने उससे छीनकर सेवन कर लिया।
अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी पिछले एक वर्ष चार माह 12 दिन से न्यायिक हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश किया जा चुका है और आरोप तय हो चुके हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष के गवाह अब तक बयान दर्ज कराने आगे नहीं आए हैं। ऐसे में अदालत ने कहा कि जब मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना कम हो, तो जमानत देना उचित है। जमानत का उद्देश्य ट्रायल के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि दोष सिद्ध होने से पहले दंड देना।