चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: किसान मजदूर मोर्चे के बैनर तले सैकड़ों किसान और मजदूर मोगा जिले के गांव किशनपुरा से किल्ली चाहलां की ओर रवाना हुए। उनका उद्देश्य पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann से लंबित मांगों पर जवाब लेना था। मार्च में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब, बीकेयू बहिराम, बीकेयू एकता आजाद और बीकेयू क्रांतिकारी समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल रहे।
किशनपुरा से कोकरी कलां के बीच किसानों ने लगाए गए पुलिस के चार नाकों को पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया और किल्ली चाहलां की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी। एसपी (आई) सिंगला की अगुवाई में अधिकारियों ने किसान नेताओं से वार्ता की।
कई दौर की बातचीत और तनावपूर्ण स्थिति के बाद सरकार ने 20 फरवरी को सुबह 11 बजे किसान भवन, चंडीगढ़ में बैठक बुलाने का लिखित भरोसा दिया। इस आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने फिलहाल मार्च स्थगित करने की घोषणा की।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि किल्ली चाहलां में हुई रैली को ‘नशों के खिलाफ अभियान’ की उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया, जबकि इस पर सरकारी धन खर्च हुआ। उन्होंने पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी की निंदा की और 27 फरवरी को अमृतसर में प्रस्तावित धरने का समर्थन करने का ऐलान किया। साथ ही शंभू-खनौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान की भरपाई, शहीद परिवारों को मुआवजा और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई।